Mangal Pooja
मंगल दोष पूजा क्या है?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, मंगल दोष कुंडली में बनने वाला एक विशेष ज्योतिषीय योग है, जिसे ‘मांगलिक दोष’ के नाम से भी जाना जाता है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब मंगल ग्रह व्यक्ति की जन्म कुंडली के पहले (लग्न), चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में स्थित होता है।
मंगल का स्वभाव और प्रभाव
ज्योतिष में मंगल को ऊर्जा, साहस, पराक्रम और उग्रता का कारक माना गया है। जब मंगल विवाह और सुख के भावों (विशेषकर 7वें और 8वें घर) में बैठता है, तो इसकी दृष्टि और ऊर्जा वैवाहिक जीवन को प्रभावित कर सकती है। मांगलिक व्यक्ति स्वभाव से थोड़े साहसी, स्पष्टवादी और कभी-कभी क्रोधी हो सकते हैं। यही कारण है कि विवाह के समय कुंडली मिलान में मंगल दोष पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
समाज में मंगल दोष को लेकर काफी डर रहता है, लेकिन यह समझना आवश्यक है कि हर मंगल दोष हानिकारक नहीं होता। कई बार बृहस्पति की दृष्टि या अन्य शुभ ग्रहों के प्रभाव से यह दोष स्वतः ही शांत हो जाता है। साथ ही, यदि दोनों जीवनसाथी मांगलिक हों, तो यह दोष एक-दूसरे के प्रभाव को संतुलित कर देता है।
निवारण और शांति पूजा
शास्त्रों में मंगल दोष के प्रभाव को कम करने के लिए मंगल दोष शांति पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर या किसी पवित्र स्थान पर विधि-विधान से की गई पूजा, भात पूजन, और हनुमान जी की आराधना से इस दोष के नकारात्मक प्रभाव समाप्त हो जाते हैं और व्यक्ति को सुखद वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।